Thursday, September 10, 2009

प्रीतीश नंदी, खुशवंत सिंह






थोडे में कहने की कला - चापलूसी की

ब्लागर निवेदनः यदि आपकी पहुँच हो तो इस लेख को सोनिया गाँधी या राहुल गाँधी को पढ़वा दें। इतना नहीं  हो सके तो प्रियंका वाड्रा को ही पढ़वा दें प्लीज या उनके बच्चों को ही बस ! इतना तो हो जायेगा न! हाँ लेकिन लेकिन जरा सावधानी से - उधर वाले लोगों से बचाना, वो भी लाइन में हैं, उनके हाथ पड़ गया तो कभी नहीं पहुँचने देंगे उनतक मुझे। यदि कुछ मिला तो आपको भी खुश कर देंगे, वादा रहा॥ उसूल के पक्के हैं हम भी.

पार्टी से अलहदा नेता – मेरा हमप्याला
ब्लागर संदेशः मिठाई खिलाओ ऐ बीजेपी वालो.... !!!!
मिल गया है तुम्हारे लिये पारस पत्थर, जिसको छू कर ( हमप्याला होकर) कुंदन बन सकते हो तुम। छुआछूत से मुक्ति का औज़ार मिल गया है न पट्ठो..। अब क्या देर है .. तो मंगवालो भई दारू-सारू...

टकाराओ जाम – पारस पत्थर के नाम

3 comments:

प्रीतीश बारहठ said...

हम मानते हैं कि प्रीतीश नंदी चाहे कितने ही बड़े कवि, पत्रकार, फिल्मकार और बुद्धिजीवी हों, वे कितने ही पढ़े-लिखे हों, उन्हें थोड़े में कहने की कला और महत्त्व से पहली बार राजीव गाँधी ने ही परिचित करवाया होगा। उन्होंने अपनी प्राथमिक कक्षाओं में भी ढंग से शिक्षा ग्रहण नहीं की। हम मानते हैं, हम मानते हैं, मानते हैं उन्हें साहित्य में भी थोडे में कहने की कला का परिचय नहीं मिला।

प्रीतीश बारहठ said...

ओ हो हो...!
जसवंत सिंह को पार्टी से नहीं निकाला गया होता तो हमें पता ही नहीं चलता कि बीजेपी में भी अच्छे और काबिल नेता हैं। कंधारकांड़ की असलियत भी हमें अब समझ आई है कि जसवंत सिंह ने अपने... हाँ अपने लोगों को बचाने के लिये जान जोखिम में डालकर एक खतरनाक़.... हाँ ख़तरनाक़ मिशन को अंजाम दिया था।

जतिन दास बंगाली न होकर भी प्रतिभाशाली हो गये यह तो कम झटके वाली बात है लेकिन उस झटके को हम कैसे बर्दाश्त करेंगे जब कोई बंगाली होकर भी प्रतिभाशाली न होगा !!!!

रंगनाथ सिंह said...

aapne satik pakada hai...ye chamachagiri k nirlajj udaharan hai..thode me talwe hatne kimkala...