Wednesday, January 6, 2010

आज़ादी

आज़ादी

मेरे देश में आज़ादी  है
15 अगस्त 1947 को हमको मिली
रात बारह बजे
अंधेरे में हम नहीं देख पाये रंग
हमने टटोलकर ही पहचानी और ले ली आजादी

अब मेरे देश में
आज़ाद हैं अफ़सर, आज़ाद हैं बाबू
नेता, कार्यकर्ता, व्यापारी, उद्यमी, ठेकेदार
सूदखोर, कर्ज़दार, नौकर, मालिक
आजाद हैं बंधुआ,
अध्यापक आज़ाद हैं, आज़ाद हैं छात्र

आजाद हैं कवि, आज़ाद हैं आलोचक
चित्रकार, अभिनेता, पेंटर, नर्तक, रंगकर्मी
गवैये, दर्शक, श्रोता, पाठक आज़ाद हैं,
लेखक आज़ाद हैं, वक्ता, पत्रकार आज़ाद हैं
स्वयंसेवी, समाजसेवी, कारसेवक, हरावल दस्ते
सब आज़ाद हैं
संगठन आज़ाद हैं, आज़ाद हैं गिरोह
आज़ाद हैं गठजोड़, और आज़ाद है

आजाद हैं ईमानदार और आज़ाद हैं बेईमान
हत्यारे, चोर, ठग, सूदखोर, ज़ेबकतरे
मिलावटिये, डाकू आजाद हैं
आज़ाद हैं साम्प्रदायिक, आज़ाद हैं आतंककारी

आज़ाद हैं संकीर्ण, आजाद हैं उदार
आज़ाद हैं भूखे, भिखारी, भगवान
आज़ाद हैं दाता, दयालु, दानव
अमीर आज़ाद हैं, ग़रीब आज़ाद हैं
आज़ाद हैं आज़ाद
और आज़ाद हैं गुलाम
आज़ादी है मेरे देश में
जो जैसा बनना चाहे बने
जैसा रहना चाहे रहे
इमानदार को पूरी आज़ादी है ईमानदारी की
और बेईमान को बेईमानी की

ऐसी दिलकश आज़ादी को
लगा कर रखेंगे काला टीका
उतार कर रखेंगे नज़र

कुछ भितरघाती अभी 63 वर्ष बाद भी
रखते हैं टेढ़ी नज़र हमारी आज़ादी पर
वे गुलामी करते हैं कानून की, नियम की
चलते हैं संभलकर, रखते हैं नीची नज़र
सर पर उठाये रहते हैं मानवता
भाईचारा, सत्य का टोकरा
वे डरते हैं, राम से, काम से, आम से,

बस एक ताबीज़ और
फिर अक्षुण्य हैं मेरे देश की
हमारी आज़ादी
पूरी आजादी दी जायेगी
ईमानदार को ईमानदारी की
बेईमान को बेईमानी की


बचना

कुछ लोग आये
हिन्दु को मारने
कुछ मुसलमान को
कुछ क्रिश्चन को,
इसी तरह कुछ जैन को, कुछ सिख को,
यहूदी को,
कुछ आस्तिक को कुछ नास्तिक को मारने आये
मुझसे पूछा तू कौन?’
मैं डर के मारे भूल गया मैं कौन?’
मैंने डरता-डरता बोला मनुष्य !’
मुझे किया गया लात मारकर एक तरफ़
और मैं बच गया

कुछ लोग आये
हिन्दु को बचाने
कुछ मुसलमान को
कुछ क्रिश्चन को
इसी तरह कुछ जैन को, कुछ सिख को
यहूदी को, बौद्ध को
कुछ आस्तिक को, कुछ नास्तिक को
मुझसे पूछा तू कौन?’
मैं खुशी के मारे भूल गया मैं कौन?’
मैंने उत्साह में चीखकर बोला मनुष्य !’
मुझे किया गया लात मारकर एक तरफ़
और मैं बच गया





3 comments:

अशोक कुमार पाण्डेय said...

अच्छी कवितायें हैं भाई प्रीतिश

रंगनाथ सिंह said...

मुझे आजदी कविता पंसद आई। आपका विस्तृत परिचय भी पसंद आया।

somadri said...

aapke blog pe pahli baar aana hua..mujhe blog ka NAAMKARAN bahut sarthak laga hai...aapki rachanaye bhi samjhane aur phir sochane ke liye prerit karti hain..

naye saal ki badhai,
http://som-ras.blogspot.com